भगवान श्रीरामचन्द्र जी के धनुष-बाण के विपरीत श्रीकृष्ण के अधरों पर बंशी शोभित रहती हैं , दोनों की वेश-भूषा राजसी हैं और कार्य जनता-जनार्दन के धर्म का पालन करना हैं । राक्षस रावण के द्वारा अपह्त माता सीता को श्रीराम जंगल-जंगल ढूंढ़ते हैं और वही श्रीकृष्ण को 16000 गोपियां ढूंढ रही हैं, क्योंकि इनके जैसा प्रेमी आज तक नही हुआ हैं और ना होगा। दोनों अवतार भगवान के पूज्य हैं । कंस के कारागार में अर्द्ध रात्रि को भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया हैं । आधी रात को श्रीकृष्ण जन्म और कारागार की बंद दरवाजों का खुल जाना इस बात का अकाट्य प्रमाण हैं कि मानव के दुःखों को दूर करने के लिए भगवान स्वयं प्रकट होते हैं । उक्त कथन श्रीमद्भागवत कथा सेवा समिति तथा श्रीश्याम सखी मंडल चांपा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा प्रेम यज्ञ के दौरान व्यासपीठ पर विराजमान परम-पूज्य पंडित हनुमान दास जी महाराज ने कथा के चतुर्थ दिवस कहा । राधाकृष्ण की दिव्य चित्र से भागवत कथा महात्म्य के विशाल मंच पर श्रद्धेय हनुमान दास जी श्रीधाम वृन्दावन वाले दिनांक 20 फरवरी से दिनांक 26 फरवरी तक मधुर वाणी से भागवतामृत का रसपान करवा रहे हैं । गुलाबी रंग व रंग-बिरंगी डिजाइनर लाईट और बालून से कथा परिसर में धूम-धाम से श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। भगवान श्रीकृष्ण बने सुभ्रांत कसेर और रेनु कसेर के नन्हे से पुत्र आकर्षण का केंद्र बने । बालक हर्ष अग्रवाल वामन अवतार के रुप में दर्शनीय रहे । नंद के वेश-भूषा में विनोद अग्रवाल, वासुदेव के स्वरूप में अनिल खेतान तथा यशोदा बनी श्रीमति शारदा अग्रवाल सचमुच सुंदर थी । हर्ष शर्मा के मम्मी-पापा श्रीमति कविता शर्मा और उदय शर्मा अपने बच्चें को देख-देखकर कर मंद-मंद मुस्कुराते रहे । इस अवसर पर आचार्य श्री ने कहा कि वासुदेव और कंस एक ही पालने में झूले लेकिन जब धर्म की वास्तविकता से कंस को ज्ञात हुआ कि इसके जन्म लेने वाला पुत्र ही उसका वध करेगा तब कंस ने आतंक मचाना शुरू कर दिया बहन-बहनोई को कारागार में डाल दिया । शास्त्रों में लिखा है कि स्त्री का आदर करना चाहिए। सबका प्रायश्चित हो सकता हैं लेकिन स्त्री को अपनामित करने वाला दंड का भागीदार होता हैं । कंस ने वासुदेव के एक-एक पुत्रो को मार डाला। योग माया ने ऐसा चमत्कार किया कि काली अंधियारी रात में भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया। श्रीकृष्ण ने कंस के आतंक से मथुरा को मुक्त किया । भगवान राम और श्री कृष्ण का जीवन चरित्र को यदि मनुष्य ध्यान पूर्वक एक-बार सुन लेता है उसका जीवन शुद्ध हो जाता हैं। कथा वाचक श्रीधाम निवासी हनुमान दास जी महाराज ने भगवान राम और कृष्ण के जन्म-जन्मांतर की कथा विस्तार-पूर्वक सुनाया। कथा स्थल का माहौल उत्साहपूर्ण और ऊर्जा से ओत-प्रोत हैं। कथा सुनने वालों में महेंद्र मित्तल,मोहन मित्तल, गजेंद्र अग्रवाल, साहित्यकार शशिभूषण सोनी, अधिवक्ता महावीर प्रसाद सोनी, पवन मोदी,कमल अग्रवाल, जगदीश मोदी, नपाध्यक्ष चांपा प्रदीप कुमार नामदेव, गणेश श्रीवास, पार्षद टीकम कंसारी, संतोष मित्तल, राकेश शर्मा सहित पुरूषों के साथ-साथ महिलाएं, बच्चें भी बड़ी संख्या में शामिल हुए ।
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