कोरबा। छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप कोरबा दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने वन प्रबंधन, वन्यजीव संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति की समीक्षा की। इस दौरान वन सचिव और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) समेत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मंत्री ने पाली के डोंगानाला वन क्षेत्र का दौरा कर वन समितियों के कामकाज की जानकारी ली और ग्रामीणों से सीधे संवाद किया।
वन समितियों के कामकाज की समीक्षा
मंत्री केदार कश्यप ने पाली के डोंगानाला वन क्षेत्र में वन प्रबंधन से जुड़े कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने स्थानीय वन समितियों के सदस्यों से बातचीत कर क्षेत्र में वन संरक्षण, पौधरोपण और जंगल से जुड़े अन्य कार्यों की जानकारी ली।
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मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वन समितियों को सक्रिय भागीदारी के साथ काम करने के लिए आवश्यक सहयोग और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। ग्रामीणों की भागीदारी से वन संरक्षण को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।
हाथी प्रभावित क्षेत्रों का लिया जायजा
कोरबा और आसपास के वन क्षेत्रों में मानव-हाथी संघर्ष लंबे समय से चुनौती बना हुआ है। हाथियों के झुंड के आबादी वाले इलाकों में पहुंचने से फसलों और संपत्ति को नुकसान के साथ-साथ जनहानि का खतरा भी बना रहता है।
मंत्री ने हाथी प्रभावित क्षेत्रों में विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि हाथियों की बढ़ती संख्या के बीच आधुनिक तकनीक और समय पर सूचना उपलब्ध कराकर संघर्ष की घटनाओं को कम किया जा सकता है।
हाथी मित्र दलों को दिए सुरक्षा उपकरण
चोटिया में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हाथी प्रभावित क्षेत्रों में काम करने वाले हाथी मित्र दलों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए। दलों को चार मोटरसाइकिलों के साथ जूते, टॉर्च और अन्य सुरक्षा उपकरण प्रदान किए गए।
इन संसाधनों की मदद से हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने और ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर सूचना पहुंचाने में सहायता मिलेगी। हाथी मित्र दल स्थानीय स्तर पर वन विभाग और ग्रामीणों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करते हैं।
वन मंत्री ने कहा कि मानव-हाथी संघर्ष को रोकने के लिए केवल पारंपरिक उपाय पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए तकनीक का इस्तेमाल और त्वरित सूचना तंत्र को मजबूत करना जरूरी है। हाथियों की लोकेशन की जानकारी समय पर मिलने से ग्रामीणों को सतर्क किया जा सकता है और संभावित घटनाओं को टाला जा सकता है।




