बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश को झकझोर देने वाले सेक्स स्कैंडल और हनीट्रैप के जरिए अवैध वसूली करने वाले गिरोह को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने इस गिरोह की मदद करने के आरोपी व्यक्ति की अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की एकल पीठ ने मामले की प्रकृति को अत्यंत गंभीर बताते हुए आरोपी को राहत देने से साफ इनकार कर दिया।
HC की टिप्पणी: “हिरासत में पूछताछ है अनिवार्य”
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के संगठित अपराध समाज के ताने-बाने को नुकसान पहुंचाते हैं। कोर्ट ने कहा:
“मामले की गंभीरता और इसमें शामिल नेटवर्क को देखते हुए आरोपी से कस्टोडियल इंटेरोगेशन (हिरासत में पूछताछ) जरूरी है। ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है।”
क्या है पूरा मामला?
यह मामला एक ऐसे गिरोह से जुड़ा है जो रसूखदार लोगों को सेक्स स्कैंडल के जाल में फंसाकर उनसे लाखों रुपये की अवैध वसूली (Extortion) करता था।
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आरोप: याचिकाकर्ता पर आरोप है कि वह इस गिरोह के सदस्यों को कानूनी दांव-पेंचों से बचाने और पुलिसिया कार्रवाई से दूर रखने में ‘मददगार’ की भूमिका निभा रहा था।
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सिंडिकेट का खुलासा: जांच में सामने आया है कि यह गिरोह सुनियोजित तरीके से लोगों को फंसाता था और फिर बदनामी का डर दिखाकर मोटी रकम वसूलता था।
पुलिस जांच को मिलेगी गति
हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब संबंधित थाना पुलिस के लिए आरोपी की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है। पुलिस का मानना है कि इस ‘मददगार’ की गिरफ्तारी से इस पूरे स्कैंडल के मास्टरमाइंड और इसमें शामिल अन्य सफेदपोश चेहरों का पर्दाफाश हो सकता है।



