कोरबा कोरबा-चांपा सड़क मार्ग अंतर्गत उरगा-कटघोरा राष्ट्रीय राजमार्ग की फोरलेन सड़क के लिए 10 साल बाद भी जमीन फाइनल नहीं हो पाई है। मानिकपुर कोयला खदान के विस्तार से मामला फंसा हुआ है। इसके लिए कोल मिनिस्ट्री को प्रस्ताव भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद सर्वे होगा। दूसरी बार एलाइनमेंट चेंज करने की तैयारी है।
51 ग्रामो की जमीन की खरीदी बिक्री पर 1 साल से रोक लगी है। जिससे लोग परेशान हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने वर्ष 2017 में चांपा से कटघोरा के बीच फोरलेन सड़क को दो चरणों में बनाने का निर्णय लिया था। पहले चरण में उरगा से चांपा के बीच सड़क बन चुकी है। यह फोरलेन सड़क बरबसपुर से बालको रिंग रोड पर कुरूडीह मोड़ के पास आकर रुक गई है। दूसरे चरण में उरगा से कटघोरा फोरलेन सड़क बननी है। इसके लिए पहले 999 करोड़ रुपए की मंजूरी मिली थी। उस समय सड़क की लंबाई 40 किमी थी, लेकिन लोगों ने अधिक मुआवजा पाने जमीन के कई टुकड़े कर दिए। पहले परसाभाठा, जामबहार से होकर फोरलेन सड़क बननी थी, लेकिन बाद में एलाइनमेंट ही बदल दिया गया। अब यह सेक्टर-4 के बाहर से बेला होते हुए गुजरेगी। इसके लिए सितंबर 2024 में 42.1 किमी सड़क बनाने 1593 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई। सर्वे के लिए एनएचएआई की टीम गूगल नक्शे का परीक्षण किया तो वहां कोल ब्लॉक और लिथियम ब्लॉक नजर आ रहा है। दोनों ही खदानों की सीमा अभी तय नहीं है। इस वजह से जमीन अधिग्रहण के लिए खसरा नंबर तय नहीं हो पा रहा है। अब कोयला मंत्रालय से मंजूरी लेने के बाद सर्वे कराया जाएगा। इससे सबसे अधिक परेशान ग्रामीण हैं।
प्रशासन ने प्रस्तावित ग्राम की जमीन को बिना अनुमति के खरीदी बिक्री पर रोक लगाई है। इसमें निगम क्षेत्र की बस्ती भी प्रभावित है। जमीन की खरीदी-बिक्री पर रोक लगने की वजह से परिवार के बीच बंटवारा नहीं कर पा रहे हैं। डायवर्सन नहीं हो रहा है। निगम से मकान बनाने एनओसी नहीं मिल रही है। किसी तरह का बड़ा प्रोजेक्ट भी यहां शुरू नहीं हो पा रहा है। इसकी वजह से लोग परेशान हैं। खरीदी बिक्री पर रोक नवंबर 2024 से लगी है। सर्वे नहीं होने के कारण यह भी तय नहीं है कि कहां कितनी जमीन अधिग्रहित की जाएगी।
(कोरबा) मानिकपुर कोयला खदान के विस्तार में फंसी फोरलेन सड़क कोल मिनिस्ट्री को भेजा जाएगा प्रस्ताव
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