Thursday, January 29, 2026

(कोरबा) ऊर्जाधानी में सड़क परिवहन व्यवसाय हुआ पुरी तरह से ठप्प-व्यवसायी हलाकान और चिंताग्रस्त

कोरबा छत्तीसगढ़ की ऊर्जाधानी कोरबा अंचल की पहचान विकासशील क्षेत्रों में सदा बनी रही हैं, किंतु इन दिनों व्यावसायिक कार्य पूरी तरह से ठप्प पड़े हुए हैं। इसके कारणों का आंकलन सही-सही नहीं हो सकता, किंतु सहज भाव से यह कहा जा सकता हैं, की कभी परिवाहन व्यवसाय में जिसका नाम सदैव सम्मान के साथ लिया जाता रहा हैं। वहां अभी केवल निराशा और हाहाकार सी स्थिति देखी जा रही हैं। इसमें सर्वाधिक हानि अर्ध सार्वजनिक उपक्रमों ने फैलाई हैं, क्योकि यहां परिवहन का कार्य पूरी तरह से शून्य हो गए हैं। सड़क मार्ग से परिवहन का कार्य बंद हो गया हैं। कच्चे माल की आवक और तैयार माल की जावक सब कुछ रेल मार्ग से बंद वैगनों के सहारे “भेजने वाला बालाजी-पाने वाला बालाजी” की गुप्त पद्यति से हो रहा हैं।

आम लोगो को यह पता नहीं चल पाता की कौन सा सामान कितनी मात्रा में किसके पास से आ रहा हैं, और कौन सा सामान तैयार हो कितनी मात्रा में किसके पास जा रहा हैं। यही हाल एसईसीएल की कोयला खदान क्षेत्रों में भी चल रहा हैं। आंकलन कर्ताओ का तो यह भी दावा हैं, कि यहां से भेजे जा रहे कोयले के कागजातों की जांच करते ही सारा घालमेल उजागर हो सकता हैं। हालांकि प्रति टन कोयले की जावक पर “लेवी वसूली” राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित कर चुकी हैं। किंतु फिर भी इसमें कोई सुधार परिलक्षित नहीं हो रहा हैं। एक और जहा सही-सही वाले कोयले की निकासी दुर्लभ हो रही हैं वही दुसरी और घालमेल की निकासी ने अंतरप्रांतीय गुंडा गिरोह का ध्यान यहां आकर्षित कर दिया हैं। उल्लेखनीय बात यह हैं की अंचल के पुराने, निर्विवाद तथा घालमेल रहित परिवहनकर्ता हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं, साथ ही वित्तीय सहायता से क्रय किये गए वाहनों को वापस खींच लेने का सिलसिला तेज हो गया हैं।

इस सब स्थितियो को देखते हुए कोरबा के भविष्य निर्माता राजनेताओ को पुरी निष्पक्षता से ईमानदार प्रयास सारे आपसी भेदभाव भूलकर करने ही होंगे। कोरबा जिले से पहले जो कोयला रायगढ़ जिले के लिये कुछ ही वर्षो पूर्व लगभग 900 रूपए टन में जाता था वही कोयला अब परिवहनकर्ता लगभग 700 रूपए टन ले जाने के लिये तैयार हो बांट जो रहे हैं। यही हाल बिलासपुर रायपुर सहित अन्य स्थानों के लिये जाने वाले कोयला परिवहन दरों का घट कर हो चुका हैं महंगाई जिस तेजी से बढ़ रही हैं उससे अधिक तेजी से परिवहन दर घट रहे हैं इस दोधारी मार से सड़क परिवहन व्यवसायी कराह उठे हैं। कोरबा के आम बाजार का भी बहुत बुरा हाल हैं। कोरबा जिला विकास की गाथाये कोई कितनी ही कर ले, किंतु धरातलीय सच्चाई बहुत निराशाजनक हैं।

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