आतंकवादी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के चीफ गुरपतवंत सिंह पन्नू का एक वीडियो वायरल हुआ है। इसे हरियाणा भाजपा के IT सेल के हेड अरुण यादव ने शेयर किया है। वीडियो में पन्नू ने दावा किया है कि खालिस्तान समर्थकों ने 2014 में दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल को 134 करोड़ रुपए देकर आर्थिक मदद की थी।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 2014 में न्यूयॉर्क के गुरुद्वारा रिचमंड हिल्स में केजरीवाल ने उसके साथ एक बैठक की थी। इस बैठक में AAP नेता ने आर्थिक मदद के बदले 1993 के दिल्ली बम ब्लास्ट में दोषी देविंदर पाल सिंह भुल्लर को जेल से छुड़वाने का वादा किया था।
पन्नू के इस वीडियो में केजरीवाल पर आरोप लगाया गया है कि वे अपने वादे से मुकर गए। हालांकि आम आदमी पार्टी (AAP) की तरफ से इस पर कोई स्टेटमेंट नहीं आया है। दैनिक भास्कर इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।

पन्नू ने केजरीवाल पर हमला करवाने की धमकी दी
पन्नू ने यह वीडियो सोमवार (25 मार्च) को जारी किया था। उसने इसमें केजरीवाल पर विश्वास तोड़ने का भी आरोप लगाया। साथ ही उसने कहा कि AAP सरकार ने कई खालिस्तानियों को गैंगस्टर बताकर उनकी हत्या करवा दी।
पन्नू ने वीडियो में चेतावनी देते हुए कहा- एक बार केजरीवाल को जेल भेज दिया गया, तो जेल में खालिस्तान समर्थक कैदी उनसे पूछताछ करेंगे। इसके अलावा उसने केजरीवाल पर जेल में हमला करवाने की धमकी भी दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस धमकी के बाद सुरक्षा एजेंसियां केजरीवाल के तिहाड़ जेल जाने पर उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
केजरीवाल ने भुल्लर की माफी के लिए राष्ट्रपति को लिखा था खत
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2014 में अरविंद केजरिवाल ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को दिल्ली बम ब्लास्ट के दोषी देविंदर पाल सिंह भुल्लर की माफी की मांग करते हुए एक लेटर भी लिखा था। जनवरी 2024 में सेंटेंस रिव्यू बोर्ड (SRB) के अध्यक्ष कैलाश गहलोत ने भुल्लर की याचिका को खारिज कर दिया था।
उनका कहना था कि यह समय से पहले रिहाई दिया जाने वाला मामला नहीं है। सात सदस्यीय SRB कमेटी का विचार था कि अगर ऐसे दोषी को रिहा किया जाता है, तो यह देश की अखंडता और शांति के लिए ठीक नहीं होगा।

1993 में दिल्ली में हुए बम ब्लास्ट में भुल्लर को सजा हुई थी
देविंदर पाल सिंह भुल्लर का जन्म 26 मई 1965 को बठिंडा के गांव दियाल बहका में हुआ। उसने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी और उसके बाद लुधियाना के एक कॉलेज में प्रोफेसर की नौकरी कर ली। 1984 में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार और दिल्ली सिख दंगों के बाद भुल्लर ने खालिस्तान लिब्रेशन फोर्स जॉइन कर ली।
भुल्लर 25 साल से ज्यादा समय से जेल में बंद है। इस साल फरवरी में भुल्लर ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से समय से पहले रिहाई की मांग वाली अपनी याचिका वापस ले ली। दरअसल, भटिंडा के दयालपुरा भाईके के रहने वाले भुल्लर पर सितंबर 1993 में हुए दिल्ली बम ब्लास्ट के मामले में केस दर्ज किया गया था। 2001 में उसे अदालत में मौत की सजा सुनाई गई थी, जिसे 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया था।

बम ब्लास्ट में 9 लोग मारे गए थे
11 सितंबर 1993 को मनिंदरजीत सिंह बिट्टा इंडियन यूथ कांग्रेस के दिल्ली स्थित दफ्तर में मीटिंग कर रहे थे। इस दौरान खालिस्तानी समर्थक देविंदर पाल सिंह भुल्लर RDX से भरी अपनी कार दफ्तर के बाहर छोड़ कर वहां से चला गया था।
थोड़ी दूर जाकर भुल्लर ने रिमोट से ब्लास्ट कर दिया था। इस ब्लास्ट में बिट्टा के दो गनमैन सहित 9 लोग मारे गए थे और 26 लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। ब्लास्ट करने के बाद भुल्लर जर्मनी भाग गया। वहां दिसंबर 1994 में उसने एप्लिकेशन देकर राजनीतिक शरण मांगी। हालांकि जर्मनी की सरकार ने इस अपील को खारिज कर उसे भारत डिपोर्ट कर दिया था।
इसके बाद भुल्लर को एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया गया था। 25 अगस्त 2001 को दोषी साबित होने पर कोर्ट ने उसे फांसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद कई सिख संगठन और यहां तक कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने फांसी माफ कर सजा उम्रकैद में तब्दील करने के लिए भारत के सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।




