Sunday, February 8, 2026

RSS Sarsanghchalak Post : मोहन भागवत का साफ संदेश संघ में हर जाति से बन सकता है सरसंघचालक

RSS नेतृत्व पर क्या बोले भागवत

भागवत ने मंच से कहा कि संघ में नेतृत्व योग्यता, समर्पण और संगठन के प्रति निष्ठा से तय होता है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि केवल ब्राह्मण होना सरसंघचालक बनने की शर्त नहीं है। संघ में काम करने वाला हर स्वयंसेवक, अगर जिम्मेदारी निभाने की क्षमता रखता है, तो शीर्ष पद तक पहुंच सकता है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में जाति आधारित राजनीति और प्रतिनिधित्व को लेकर बहस तेज है। व्याख्यान के दौरान सभागार में मौजूद स्वयंसेवकों ने शांत होकर बात सुनी। कार्यक्रम स्थल के बाहर दादर इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम दिखे।

आधिकारिक बयान

“संघ में पद जाति से नहीं, कार्य और संस्कार से तय होते हैं। समाज का हर वर्ग नेतृत्व दे सकता है।”
— मोहन भागवत, सरसंघचालक, RSS

राजनीतिक और सामाजिक असर

भागवत के इस बयान को संघ की समावेशी छवि से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह संदेश न सिर्फ स्वयंसेवकों के लिए है, बल्कि व्यापक समाज को भी संकेत देता है कि संगठन खुद को किसी जातीय ढांचे में सीमित नहीं मानता। फिलहाल RSS की ओर से कार्यक्रम के बाद कोई अतिरिक्त लिखित बयान जारी नहीं हुआ है। संघ सूत्रों के मुताबिक, शताब्दी वर्ष के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में इसी तरह के व्याख्यान और कार्यक्रम जारी रहेंगे।

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