कोरबा.कोरबा जिले में सौर ऊर्जा से बिजली बनाने का राज्य उत्पादन कंपनी के संयंत्रों का प्रोजेक्ट आगे बढ़ेगा, क्योंकि पिछले महीने सौर ऊर्जा परियोजनाओं को विकसित करने छत्तीसगढ़ राज्य बिजली उत्पादन कंपनी व देश की सबसे बड़ी एकीकृत बिजली परियोजना एनटीपीसी की सहायक कंपनी मेसर्स एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के बीच एमओयू हो चुका है।
राज्य बिजली उत्पादन कंपनी छत्तीसगढ़ की घरेलू बिजली की जरूरतों को पूरा करती है। साल दर साल प्रदेश में बिजली की मांग भी बढ़ रही है। साल 2030 तक छत्तीसगढ़ में बिजली की मांग 8 हजार मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। इस कारण नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल से बिजली उत्पादन की योजना भी बनाई गई है। इस तरह साल 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। बिजली उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल से कार्बन फुट प्रिंट को कम करना है।
राज्य बिजली उत्पादन कंपनी का ताप आधारित एचटीपीपी व डीएसपीएम बिजली संयंत्र है। दोनों ही संयंत्र ने 4 राखड़ डैम में मिट्टी फिलिंग कराकर सोलर प्लांट लगाने की योजना बनाई है। इसके अलावा संयंत्र परिसर के दफ्तरों में सोलर पैनल इंस्टॉल कराकर सौर ऊर्जा से बिजली बनाने की है। ताकि दफ्तरों की आधे से ज्यादा बिजली जरूरतें नवीकरणीय ऊर्जा से किया जा सके। उत्पादन कंपनी व एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड की ज्वाइंट वेंचर कंपनी 2 हजार मेगावाट तक सौर ऊर्जा परियोजना को विकसित करने समझौता हुआ है।
बिजली की साल दर साल बढ़ती डिमांड से नवीकरणीय ऊर्जा के विकल्प की तलाश करना जरूरी था। इसी के तहत पानी से बिजली बनाने के प्रोजेक्ट पर भी काम जारी है। इनमें से कई प्रोजेक्ट डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) नहीं बनने के कारण अटकी हुई है। ऊर्जा का प्रमुख संसाधन अभी कोयला है। इसके उपयोग से सर्वाधिक बिजली पैदा होती है।
इन 4 राखड़ डैम में कराई गई है मिट्टी की फिलिंग पर्यावरण मंत्रालय के प्रावधानों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 तक चार राखड़ बांध के स्थिरीकरण की प्रक्रिया पूरा करने का है। इसके लिए मिट्टी फिलिंग कराया गया है। कोरबा पूर्व स्थित पोड़ीमार फेस-1 और 2, पीएबी पोंड क्रमांक 2 और कोरबा पश्चिम एचटीपीपी संयंत्र के डंगनियाखार और लोतलोता राखड़ डैम का स्टेबिलाइजेशन कार्य शामिल है।
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