द मॉडर्न विलेज ,चांपा में बिरथरे परिवार के द्वारा इन दिनों आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का यह चित्र केवल एक ग्रुप फोटो नही, बल्कि आस्था , एक-दुसरे के प्रति सम्मान और वृंदावन की संस्कृति का जीवंत संगम हैं ।
तस्वीर के मध्य में श्रीमद्भागवत कथा की ओजस्वी वाचिका तथा वृंदावन से प्रशिक्षित श्रीमति सविता गोस्वामी जी कथा के चार घंटे के बाद तुरंत ही प्रिंट मीडिया के शशिभूषण सोनी के आग्रह पर एक फोटो और संक्षिप्त बातचीत के लिए बिना झिझक तैयार हो गई । श्रीमति सविता गोस्वामी जी के हाथों में लड्डू गोपाल की वह मनोहारी प्रतिमा हैं जो इस भागवत कथा की आत्मा हैं । गुलाबी वस्त्र में उनकी सौम्य मुस्कान बता रही हैं कि उन्होंने वृंदावन की जिस भक्ति-परंपरा को आत्मसात किया हैं, वही वे कोसा, कांसा और कंचन की पवित्र नगरी, चांपा की धरती पर लुटा रही हैं । हाथ में लड्डू गोपाल का होना इस बात का प्रतीक हैं कि कथा वाचिका केवल कथा ही नही कहती वे स्वयं कृष्णमय हो जाती हैं । उनके अगल-बगल साथ खड़े व्यक्तित्व इस आयोजन की गरिमा को और भी बढ़ा रहे हैं, जिससे उनकी ख्याति दूर-दूर तक फैले ।
आयोजक परिवार की डॉ स्वाति दुबे जी
क्रीम वस्त्र में आयोजक के रूप में उनकी उपस्थिति परिवार की कथा के प्रति अगाध श्रद्धा और भक्ति को दर्शाती हैं । पूरा परिवार आरती में तल्लीन दिखा, यह संस्कारों की जीत हैं ।
श्रीमति कल्याणी केसरवानी
आध्यात्मिक आयोजनों की सक्रिय सहभागी, जिनकी उपस्थिति महिला शक्ति के धर्म से जुड़ाव का ही प्रमाण हैं।
डॉ रविन्द्र कुमार द्विवेदी जी
शहर के प्रबुद्ध वर्ग का प्रतिनिधित्व ! आत्मानंद स्कूल में शिक्षक, निराला साहित्य मंडल के प्रधान सचिव, शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष जांजगीर-चांपा के साथ विभिन्न संगठनों से जुड़े हुए उनका इस मंच पर होना बताता हैं कि भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नही बल्कि बौद्धिक और सामाजिक चेतना का केंद्र भी हैं ।
शशिभूषण सोनी एक व्यक्तित्व
शशिभूषण सोनी जी टोपी पहन हुए – विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अग्रणी, पूर्व सहायक प्राध्यापक ( वाणिज्य ) राजा मयूर ध्वज महादानी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, चांपा में वर्षों तक सेवाएं देते हुए प्रिंट मीडिया के सहयोगी लेखक हैं । वे हर धार्मिक और सामाजिक आयोजन को अपनी कैमरे की नजर से इतिहास बनाते हैं । उनका हाथ से इशारा करना , यह बताना कि देखिए , यही हैं चांपा की असली तस्वीरें , जहां धर्म और समाज एक साथ खड़े हैं । कुल मिलाकर यह फोटो चांपा के बदलते स्वरूप को दिखाता हैं । जहां एक ओर वृंदावन से आई प्रशिक्षित विदुषी कथा वाचिका हैं तो दूसरी ओर स्थानीय प्रबुद्धजन और आयोजक परिवार के सदस्य ।
आतिथ्य को भगवान मानना चांपा की परंपरा
लड्डू गोपाल को हाथ में देकर सम्मानित करना। चांपा नगर की एक परंपरा रही हैं – अतिथि को भगवान मानना ! यह आयोजन न केवल बिरथरे परिवार का निजी अनुष्ठान हैं जरुर परंतु पूरे द मॉडर्न विलेज के लिए एक आध्यात्मिक उत्सव बन गया हैं ।




