पांचवी सदी की प्राचीन सिलाई तकनीक से बना भारतीय नौसेना का पोत INSV कौंडिन्य गुजरात के पोरबंदर से 17 दिनों की अपनी पहली विदेशी यात्रा पूरी कर बुधवार को ओमान की राजधानी मस्कट पहुंच गया। इस ऐतिहासिक यात्रा को भारत और ओमान के बीच प्राचीन समुद्री संपर्कों के प्रतीकात्मक पुनर्जीवन के रूप में देखा जा रहा है। खास बात यह है कि इस जहाज में न तो इंजन लगा है और न ही धातु की कोई चीज।
मस्कट में भव्य स्वागत
INSV कौंडिन्य पर कमांडर विकास शेरोन के नेतृत्व में चार अधिकारियों और 13 नौसैनिकों के दल का पोर्ट सुल्तान काबूस में भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, भारतीय दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी, ओमान के विरासत एवं पर्यटन मंत्रालय तथा रॉयल नेवी ऑफ ओमान के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
नारियल की रस्सियों और प्राकृतिक रेजिन से बनाया गया (फोटो- पीटीआई)
इस मौकै पर आयोजित समारोह में मंत्री सोनोवाल ने कहा कि यह यात्रा भारत की समुद्री विरासत, इतिहास और शक्ति को याद दिलाती है। इस अभियान ने भारत को गौरवान्वित किया है और ओमान के साथ सदियों पुराने संबंधों को और मजबूत किया है। उन्होंने इसे गहरे सभ्यतागत बंधन का उत्सव बताया और कहा कि मस्कट में इस सिले हुए जहाज का आगमन भारत-ओमान मित्रता की स्थायित्व का प्रतीक है, जो इतिहास में निहित है और व्यापार व पारस्परिक सम्मान से समृद्ध हुई है।



