श्रीराम के अनन्य भक्त के रुप में संकटमोचक हनुमानजी शास्त्रों और पुराणों में वर्णित हैं। वे अष्ट चिरंजीवी देवताओं में गिने जाते हैं। नि:स्वार्थ भक्ति, पराक्रम, विद्या,गुण और चातुर्य से परिपूर्ण होने के कारण सर्वजन के प्रिय देवता हैं । चांपा नगर के प्रगैतिहासिक तथा 250 वर्ष पुरानी श्री जगन्नाथ बड़े मठ मंदिर में ज्येष्ठ मास के पवित्र अष्टम मंगल जिसे बड़ा मंगलवार कहा जाता हैं । इस मंदिर में भक्ति-भाव का अद्भुत दृश्य देखने को मिला । हाल के वर्षों से प्रारंभ हुई प्रति मंगलवार को सामूहिक रूप से सुंदरकांड, बजरंग बाण, हनुमान चालीसा के बाद महाआरती की गई । अब तक 127 वां सुंदरकांड पाठ भक्तिभाव से पूर्ण हुआ । मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित श्रीकृष्णधर मिश्रा जी श्वेत वस्त्र धारी इस वयोवृद्ध पंडित ने सिंदूरी रंग में रंगी विशाल दक्षिणमुखी हनुमान की विधि-विधान से महाआरती उतारी । पीली टाइल्स वाले गर्भ-गृह में स्थापित दो हनुमानजी की प्रतिमा स्थापित हैं । इस मंदिर के एक ओर श्री जगन्नाथ जी, राम, लक्ष्मण,भरत,शत्रुघ्न और सीता की मूर्ति हैं तो दूसरी ओर ठीक सामने दक्षिण मुखी हनुमानजी की दो-मूर्तियां प्रति स्थापित हैं । मानो श्री जगन्नाथ जी के रुप में हनुमानजी के नेत्र श्रीरामचन्द्र जी के रुप का अन्वेषण करने में लगे हुए हैं ।
बड़े मठ मंदिर में जगन्नाथ स्वामी, बलदेव एवं सुभद्रा की भी विशाल काष्ठ प्रतिमा हैं । सामने वाले छोटे मंदिर में हनुमान जी की आदमकद मूर्ति हैं । जिनमें से एक सांद्र सिंदुर से लिप्त एवं दुसरी मूर्ति प्रभु के सामने आज्ञा की बांट जोड़ते हुए दृष्टिगोचर हैं । इसके अतिरिक्त अनेक छोटी-छोटी मूर्तियों के अनेक विग्रह भी विराजमान हैं ।
अष्टम मंगलवार को महाआरती का दृश्य
कंधे पर अंग वस्त्र डाले हुए वयोवृद्ध पुजारी पंडित कृष्णधर मिश्रा ने पंचमुखी दीप से प्रभु का गुणगान करते हुए आधुनिक इलेक्ट्रानिक यंत्रों से सुसज्जित धुन पर महाआरती की । इस दौरान हनुमान जी को विभिन्न श्रद्धालुओं ने तरह-तरह के भोग लगाएं । शशिभूषण सोनी ने घर से बनाएं हुए शुद्ध देसी घी के रोठ का भोग हनुमानजी को लगाया और मोगरा के फूलों की माला एवं हनुमान जी को सिंदूर से श्रृंगारित किया । प्रतिमा के चरणों में नारियल भी लगाया गया । इस दरमियान दीप की लौ से सिंदूरी प्रतिमा का आभा मंडल और भी दैदीप्यमान हो उठा ।
बड़े मठ मंदिर का भक्तिमय माहौल
पत्यर के विशाल चट्टानों से निर्मित इस मंदिर को देखने से यह स्पष्ट होता हैं कि इसके निर्माताओं ने अपार श्रद्धा और परिश्रम करते हुए कैसे मंदिर का निर्माण किया होगा । पीतल के चादरों से मढ़े हुए वज्र कपाट, ऊंचे-ऊंचे गगनचुंबी विशाल शिखर और हाथों से उकेरी गई विशाल आकृतियां मध्यकालीन मूर्तिकला तथा चित्रकला की पहचान कराती हैं । विशाल छत्र के नीचे विराजे प्रभु जी के चमचमाती हुई मुकुट पर चांदी का काम किया हुआ था । आरती के बाद पुजारी मिश्रा जी ने मंदिर के बाहर भी आरती उतारी। जहां लोहे के द्वार पर घंटियां बंधी थी। मंदिर परिसर में मंगलवार होने के कारण श्रद्धालु भक्तों की संख्या कुछ ज्यादा ही थी, यानी कि पूरा का पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया ।
आस्था का मुख्य केन्द्र
स्थानीय लोगों के अनुसार यह जगन्नाथ बड़े मठ मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का एक प्रमुख केंद्र हैं । प्रतिदिन सुबह , दोपहर और सायंकाल के बाद यहां आरती होती हैं और मंगल व शनिवार को विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता हैं । संकटमोचन हनुमान जी से सुख-समृद्धि की कामना लेकर दूर-दूर से भक्त यहां आते हैं ।
मंदिर में दर्शन-पूजन में सहभागी बने भक्त जन
स्वर्णकार समाज की ऊर्जावान महिला श्रीमति मीनाक्षी-मोहन सोनी ने बताया कि संकटमोचक, भक्त वत्सल दक्षिण मुखी हनुमान जी महाराज की कृपा सभी पर सदैव बनी रहें । वे सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, आरोग्य, यश एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार करें तथा समस्त कष्टों का निवारण करें । इस अवसर पर पं प्रशांत तिवारी, विनोद तिवारी, प्रदीप स्वर्णकार, लालचंद, कृष्णा देवांगन , अनिल, हरि, संतोष कुमार देवांगन, राजू, वासु, महेंद्र कुमार देवांगन, राजेश कुमार अहीर, अशोक सोनी, शशिभूषण सोनी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त मौजूद थे ।



