Monday, January 12, 2026

Shri Yantra Sthapana : धातु का टुकड़ा या ब्रह्मांडीय शक्ति, जानिए श्रीयंत्र का सत्य

Shri Yantra Sthapana, नई दिल्ली, 08 जनवरी 2026 – हिंदू धर्म और अध्यात्म में प्रतीकों का बड़ा महत्व है, लेकिन जब बात धन और ऐश्वर्य की आती है, तो ‘श्रीयंत्र’ का स्थान सर्वोपरि माना जाता है। इसे यंत्र राज कहा जाता है, जिसे देवी लक्ष्मी का साक्षात स्वरूप माना गया है। लेकिन क्या केवल इसे बाजार से लाकर घर में रख लेना ही काफी है? विशेषज्ञों का मानना है कि श्रीयंत्र की स्थापना महज एक सजावट नहीं, बल्कि एक गहरी आध्यात्मिक प्रक्रिया है जिसके लिए सही नियम और समर्पण की आवश्यकता होती है।

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श्रद्धा और विधान का संगम

श्रीयंत्र को घर में लाने का अर्थ है साक्षात लक्ष्मी को आमंत्रित करना। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस यंत्र की ज्यामिति इतनी जटिल और प्रभावशाली है कि यह ब्रह्मांड की सकारात्मक ऊर्जा को एक केंद्र पर केंद्रित कर देती है। हालांकि, इसकी पूर्ण कृपा प्राप्त करने के लिए इसे विधि-विधान से स्थापित करना अनिवार्य है।

इसे स्थापित करने से पहले पंचामृत और गंगाजल से शुद्धिकरण की प्रक्रिया की जाती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे घर के मंदिर में या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में ही रखा जाना चाहिए, क्योंकि यही वह स्थान है जहाँ से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यदि दिशा का चुनाव गलत हो, तो इसके शुभ प्रभाव में कमी आ सकती है।

केवल स्थापना नहीं, निरंतरता है जरूरी

कई लोग उत्साह में श्रीयंत्र की स्थापना तो कर देते हैं, लेकिन समय के साथ इसकी देखभाल में कमी आ जाती है। जानकारों का कहना है कि श्रीयंत्र एक ‘जीवित’ ऊर्जा केंद्र की तरह है। इसे प्रतिदिन धूप-दीप दिखाना और शुक्रवार के दिन विशेष पूजन करना इसकी शक्ति को बढ़ाए रखता है।

इसकी बनावट में नौ त्रिकोण होते हैं जो आपस में मिलकर 43 छोटे त्रिकोण बनाते हैं। यह जटिल संरचना इस बात का प्रतीक है कि जीवन की जटिलताओं के बीच भी अनुशासन और सही दिशा से समृद्धि पाई जा सकती है। यदि आप इसे घर ला रहे हैं, तो यह सुनिश्चित करें कि आप इसकी पवित्रता बनाए रखने के लिए मानसिक और शारीरिक शुद्धि का पालन करेंगे।

विशेषज्ञों का मत

“श्रीयंत्र की स्थापना करना धन प्राप्ति का कोई जादुई बटन नहीं है, बल्कि यह आपके घर के वास्तु और आपकी मानसिक ऊर्जा को सही दिशा में संरेखित करने का एक माध्यम है।”

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