- बड़ा मुकाबला: आज मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के पास मौजूद विभागों की अनुदान मांगों पर होगी विस्तृत चर्चा।
- प्रश्नकाल का दबाव: विपक्ष ने कानून-व्यवस्था, भर्ती परीक्षाओं और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर मंत्रियों को घेरने की रणनीति बनाई।
- अगला टारगेट: 17 मार्च को विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) पटल पर रखा जाएगा, जिससे बजट प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंचेगी।
Chhattisgarh Assembly Budget Session 2026 , रायपुर — छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र का आज 11वां दिन है और यह दिन सदन की कार्यवाही के लिहाज से सबसे अहम माना जा रहा है। आज विधानसभा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रभार वाले विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा होगी। विपक्ष (कांग्रेस) ने मुख्यमंत्री के विभागों की कार्यप्रणाली और बजट आवंटन को लेकर ‘आक्रामक फील्डिंग’ सजा ली है, जिससे सदन में तीखी बहस होना तय है।
मैदान-ए-जंग: प्रश्नकाल में ‘बाउंसर’ फेंकने की तैयारी
कार्यवाही की शुरुआत सुबह 11 बजे प्रश्नकाल से होगी। विपक्ष ने किसानों की स्थिति, हालिया भर्ती परीक्षाओं के परिणाम और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को लेकर मंत्रियों को सवालों के कटघरे में खड़ा करने की तैयारी की है। विशेष रूप से गृह और सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) से जुड़े सवालों पर सदन का पारा बढ़ सकता है। मुख्यमंत्री के विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सरकार अपनी ‘SANKALP’ विजन के तहत प्रस्तावित नई योजनाओं का बचाव करेगी, जबकि विपक्ष खर्चों की प्राथमिकता और पुरानी योजनाओं के बंद होने पर सवाल उठाएगा।
“हमारी सरकार हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है। यह बजट छत्तीसगढ़ के विकास का रोडमैप है और हम जनता के एक-एक पैसे का हिसाब पारदर्शिता के साथ देंगे।”
— विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़
“सदन में जनता के मुद्दों को अनदेखा किया जा रहा है। हम मुख्यमंत्री के विभागों की अनुदान मांगों पर तथ्यात्मक चर्चा करेंगे और सरकार की खामियों को उजागर करेंगे।”
— चरणदास महंत, नेता प्रतिपक्ष
11वें दिन की चर्चा के बाद, बजट सत्र अब अपने ‘डेथ ओवरों’ में प्रवेश कर रहा है। 17 मार्च को छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक-2026 सदन में पेश किया जाएगा। इसके बाद 18 मार्च को इस पर चर्चा और इसे पारित करने की प्रक्रिया होगी। आज की बहस यह तय करेगी कि सरकार अपने प्रमुख ‘मिशन-मोड’ प्रोजेक्ट्स (जैसे AI मिशन और बुनियादी ढांचा सुधार) के लिए सदन का विश्वास कितनी मजबूती से जीत पाती है।


