दुनिया के नक्शे पर अगर आप इजरायल को ढूंढेंगे, तो वो एक बिंदी जैसा दिखाई देगा. लेकिन आज की तारीख में यह छोटा सा देश एक सुपरपावर की तरह बर्ताव कर रहा है. हरियाणा से छोटा ही है इजराइल. 7 और 8 जून 2026 की रात से मिडल ईस्ट में जो ताजा जंग भड़की है, उसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है. एक तरफ इजरायल लेबनान में घुसकर हिजबुल्लाह को मार रहा है, तो दूसरी तरफ उसने सीधे ईरान की राजधानी तेहरान और इसफहान पर हवाई हमले कर दिए हैं.
इस पूरी कहानी में सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि दुनिया का सबसे ताकतवर देश ‘अमेरिका’ भी इस जंग में अरबों डॉलर फूंकने के बाद महंगाई और मंदी के डर से हाय-हाय करने लगा है, लेकिन इजरायल के इरादे अब भी बुलंद हैं. ऐसे में सवाल है कि ‘आखिर इजरायल के पास इतना पैसा आता कहां से है? दो-दो मोर्चों पर मिसाइलें दागने और जंग लड़ने का ये भारी-भरकम खर्चा इजरायल उठा कैसे रहा है?’
1. जंग का खर्चा कितना है और इजरायल का नया बजट क्या कहता है?
जंग कोई बच्चों का खेल नहीं है. इजरायल जो ‘आयरन डोम’ एयर डिफेंस सिस्टम इस्तेमाल करता है, उसकी सिर्फ एक इंटरसेप्टर मिसाइल दागने का खर्चा करीब 40 से 50 लाख रुपये आता है. बैंक ऑफ इजरायल और वहां के वित्त मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार…
जंग कोई बच्चों का खेल नहीं है. इजरायल जो ‘आयरन डोम’ एयर डिफेंस सिस्टम इस्तेमाल करता है, उसकी सिर्फ एक इंटरसेप्टर मिसाइल दागने का खर्चा करीब 40 से 50 लाख रुपये आता है. बैंक ऑफ इजरायल और वहां के वित्त मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार…
कुल युद्ध का खर्च: अक्टूबर 2023 से लेकर अप्रैल 2026 के अंत तक इस पूरे बहु-मोर्चीय युद्ध पर इजरायल 405 अरब शेकेल (लगभग 138 अरब डॉलर) खर्च कर चुका है.
ईरान से सीधी भिड़ंत का बिल: सिर्फ ईरान के खिलाफ फरवरी से अप्रैल 2026 के बीच चली शुरुआती सैन्य मुहिम का खर्च ही 35 अरब शेकेल (करीब 12 अरब डॉलर) आया था.
2026 का ऐतिहासिक डिफेंस बजट: अपनी सेना की ताकत को बनाए रखने के लिए इजरायल की संसद (नेसेट) ने मार्च 2026 के अंत में देश का अब तक का सबसे बड़ा बजट पास किया है. इस 268 अरब डॉलर के कुल बजट में से अकेले 45 अरब डॉलर (लगभग 17%) सिर्फ डिफेंसके लिए अलॉट किया गया है. ये बजट पिछले साल के मुकाबले करीब 9.5 अरब डॉलर ज्यादा है.
2. पैसा कहां से लाता है इजरायल?
इतने अरबों डॉलर इजरायल की तिजोरी में अचानक नहीं आते. इसके पीछे इजरायल की सोची-समझी आर्थिक रणनीति और कुछ वैश्विक कड़ियां हैं:
इतने अरबों डॉलर इजरायल की तिजोरी में अचानक नहीं आते. इसके पीछे इजरायल की सोची-समझी आर्थिक रणनीति और कुछ वैश्विक कड़ियां हैं:
A. अमेरिका की ‘अंधाधुंध’ सैन्य मदद
यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि अमेरिका इजरायल का सबसे बड़ा मददगार है. काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (CFR) की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के डिफेंस बजट का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा सीधे अमेरिकी अनुदान से आता है. अमेरिका और इजरायल के बीच एक पुराना समझौता है, जिसके तहत अमेरिका हर साल इजरायल को 3.8 अरब डॉलर की बंधी-बंधाई सैन्य मदद देता है. इसके अलावा, जब भी जंग भड़कती है, अमेरिकी कांग्रेस (संसद) इजरायल के लिए अरबों डॉलर का ‘इमरजेंसी फंड’ पास कर देती है. इजरायल इस पैसे का इस्तेमाल अमेरिका से ही एडवांस हथियार, लड़ाकू विमान और मिसाइलें खरीदने में करता है.
यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि अमेरिका इजरायल का सबसे बड़ा मददगार है. काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (CFR) की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के डिफेंस बजट का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा सीधे अमेरिकी अनुदान से आता है. अमेरिका और इजरायल के बीच एक पुराना समझौता है, जिसके तहत अमेरिका हर साल इजरायल को 3.8 अरब डॉलर की बंधी-बंधाई सैन्य मदद देता है. इसके अलावा, जब भी जंग भड़कती है, अमेरिकी कांग्रेस (संसद) इजरायल के लिए अरबों डॉलर का ‘इमरजेंसी फंड’ पास कर देती है. इजरायल इस पैसे का इस्तेमाल अमेरिका से ही एडवांस हथियार, लड़ाकू विमान और मिसाइलें खरीदने में करता है.
B. इजरायल की खुद की ‘हाई-टेक’ तिजोरी
इजरायल को सिर्फ अमेरिका के भरोसे रहने वाला देश समझना बहुत बड़ी भूल होगी. इजरायल की अपनी अर्थव्यवस्था बेहद मजबूत है. इजरायल को दुनिया का स्टार्टअप नेशन कहा जाता है. अमेरिका के सिलिकॉन वैली के बाद इजरायल में दुनिया के सबसे ज्यादा टेक-स्टार्टअप्स हैं. एप्पल, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और इंटेल जैसी दिग्गज कंपनियों के सबसे बड़े रिसर्च सेंटर इजरायल में हैं.
इजरायल को सिर्फ अमेरिका के भरोसे रहने वाला देश समझना बहुत बड़ी भूल होगी. इजरायल की अपनी अर्थव्यवस्था बेहद मजबूत है. इजरायल को दुनिया का स्टार्टअप नेशन कहा जाता है. अमेरिका के सिलिकॉन वैली के बाद इजरायल में दुनिया के सबसे ज्यादा टेक-स्टार्टअप्स हैं. एप्पल, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और इंटेल जैसी दिग्गज कंपनियों के सबसे बड़े रिसर्च सेंटर इजरायल में हैं.
इजरायल की प्रति व्यक्ति आय साल 2026 के आईएमएफ (IMF) के आंकड़ों के अनुसार लगभग 69,804 डॉलर है, जो दुनिया के कई अमीर यूरोपीय देशों से भी ज्यादा है. इसी हाई-टेक सेक्टर से इजरायल सरकार को इतना भारी टैक्स मिलता है कि वह जंग का खर्च उठा सके.
C. घरेलू हथियार उद्योग
इजरायल का अपना खुद का डिफेंस प्रोडक्शन बेस बहुत मजबूत है. इजरायल की सरकारी और प्राइवेट कंपनियां (जैसे Elbit Systems) 24 घंटे तीनों शिफ्टों में काम करके देश के भीतर ही तोप के गोले, ड्रोन और मिसाइलें बना रही हैं. इजरायल अपने हथियारों को दुनिया भर में बेचकर (एक्सपोर्ट करके) भी मोटी कमाई करता है और युद्ध के समय दूसरों पर निर्भर नहीं रहता.
इजरायल का अपना खुद का डिफेंस प्रोडक्शन बेस बहुत मजबूत है. इजरायल की सरकारी और प्राइवेट कंपनियां (जैसे Elbit Systems) 24 घंटे तीनों शिफ्टों में काम करके देश के भीतर ही तोप के गोले, ड्रोन और मिसाइलें बना रही हैं. इजरायल अपने हथियारों को दुनिया भर में बेचकर (एक्सपोर्ट करके) भी मोटी कमाई करता है और युद्ध के समय दूसरों पर निर्भर नहीं रहता.
D. भारी-भरकम कर्ज और टैक्स में बढ़ोतरी
पैसा जुटाने के लिए इजरायल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों से भारी कर्ज लिया है. युद्ध की वजह से इजरायल का ‘कर्ज-टू-जीडीपी रेशियो’ जो पहले 60% था, वह अब बढ़कर 69% के करीब पहुंच गया है. इसके अलावा, वहां की जनता पर टैक्स और सोशल सिक्योरिटी का बोझ भी बढ़ा दिया गया है. यानी इजरायली जनता अपनी सेना के लिए खुद की जेब काटने को भी तैयार है.
पैसा जुटाने के लिए इजरायल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों से भारी कर्ज लिया है. युद्ध की वजह से इजरायल का ‘कर्ज-टू-जीडीपी रेशियो’ जो पहले 60% था, वह अब बढ़कर 69% के करीब पहुंच गया है. इसके अलावा, वहां की जनता पर टैक्स और सोशल सिक्योरिटी का बोझ भी बढ़ा दिया गया है. यानी इजरायली जनता अपनी सेना के लिए खुद की जेब काटने को भी तैयार है.
| देश | आबादी (लगभग) | क्षेत्रफल (साइज) | जीडीपी (इकोनॉमी) |
|---|---|---|---|
| इजरायल | ~1 करोड़ | ~22,000 वर्ग किमी | $719 अरब (2026 IMF) |
| लेबनान | ~54 लाख | ~10,400 वर्ग किमी | बेहद कमजोर (आर्थिक कंगाली) |
| ईरान | ~8.8 करोड़ | ~16,48,000 वर्ग किमी | $300 अरब (2026 IMF) |
साइज का अंतर
क्षेत्रफल के मामले में ईरान इजरायल से लगभग 75 गुना बड़ा है और आबादी में 9 गुना बड़ा है. लेकिन आर्थिक मोर्चे पर ट्विस्ट देखिए, ईरान की 8.8 करोड़ की आबादी मिलकर जितना कमाती है यानी करीब 300 अरब डॉलर, इजरायल की सिर्फ 1 करोड़ आबादी उससे दोगुने से भी ज्यादा, 719 अरब डॉलर की जीडीपी पैदा करती है. यही इजरायल की असली ताकत है.
क्षेत्रफल के मामले में ईरान इजरायल से लगभग 75 गुना बड़ा है और आबादी में 9 गुना बड़ा है. लेकिन आर्थिक मोर्चे पर ट्विस्ट देखिए, ईरान की 8.8 करोड़ की आबादी मिलकर जितना कमाती है यानी करीब 300 अरब डॉलर, इजरायल की सिर्फ 1 करोड़ आबादी उससे दोगुने से भी ज्यादा, 719 अरब डॉलर की जीडीपी पैदा करती है. यही इजरायल की असली ताकत है.
4. देश की इकोनॉमिक ग्रोथ कैसी है? क्या इजरायल टूट रहा है?
लगातार दो साल से चल रहे इस युद्ध ने इजरायल की अर्थव्यवस्था पर चोट तो जरूर पहुंचाई है, लेकिन वह टूटी नहीं है.
लगातार दो साल से चल रहे इस युद्ध ने इजरायल की अर्थव्यवस्था पर चोट तो जरूर पहुंचाई है, लेकिन वह टूटी नहीं है.
ग्रोथ रेट का सच: द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के लंबा खिंचने के कारण इजरायल के वित्त मंत्रालय ने साल 2026 के लिए अपनी आर्थिक विकास दर को 5.2% से घटाकर 4% से कम कर दिया है.
असर कहां पड़ रहा है? चूंकि इजरायल के हजारों युवा जो टेक कंपनियों में काम करते थे, इस समय रिजर्व सैनिक बनकर बॉर्डर पर बंदूक थामे खड़े हैं, इसलिए कंपनियों में काम प्रभावित हुआ है. देश में महंगाई बढ़ी है और हेल्थ व एजुकेशन बजट में कटौती करनी पड़ी है. वहां के कुछ अर्थशास्त्री इसे ‘ट्रॉमा इकोनॉमी’ यानी झटके झेलती अर्थव्यवस्था कह रहे हैं.
झेलने की क्षमता: इसके बावजूद, इजरायल का विदेशी मुद्रा भंडार इतना मजबूत है कि वह इस झटके को सह पा रहा है.
5. अमेरिका क्यों कर रहा है हाय-हाय, जबकि इजरायल के इरादे बुलंद हैं?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनका प्रशासन इस युद्ध को रोकने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है. अमेरिका के परेशान होने के पीछे सीधा गणित है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनका प्रशासन इस युद्ध को रोकने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है. अमेरिका के परेशान होने के पीछे सीधा गणित है.
आईएमएफ की अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस युद्ध के कारण ईरान ने अगर कच्चे तेल की सप्लाई वाले समुद्री रास्ते को पूरी तरह ठप कर दिया, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 110 से 125 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं.
अमेरिका में मंदी का खतरा: अगर तेल इतना महंगा हुआ, तो अमेरिका की खुद की जीडीपी ग्रोथ गिरकर 1.5% रह जाएगी और वहां महंगाई 4.5% से ऊपर कूद जाएगी. अमेरिका पहले ही यूक्रेन और मिडल ईस्ट में अरबों डॉलर फूंक चुका है, इसलिए वह और आर्थिक बोझ नहीं उठाना चाहता.
इजरायल के बुलंद इरादे क्यों हैं?
इजरायल के लिए यह लड़ाई किसी मुनाफे या घाटे का सौदा नहीं है, बल्कि उसके लिए यह अस्तित्व की लड़ाई है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच का मानना है कि अगर इस बार वे पीछे हट गए, तो हिजबुल्लाह और ईरान उन्हें नक्शे से मिटा देंगे.
इजरायल के लिए यह लड़ाई किसी मुनाफे या घाटे का सौदा नहीं है, बल्कि उसके लिए यह अस्तित्व की लड़ाई है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच का मानना है कि अगर इस बार वे पीछे हट गए, तो हिजबुल्लाह और ईरान उन्हें नक्शे से मिटा देंगे.
वहीं के वित्त मंत्री स्मोट्रिच ने बजट पास करते समय कड़े लहजे में कहा था,
“इस बजट का मूल ही यही है कि हम अपनी सेना को इतने अरबों रुपये दें ताकि हम इस अभियान को अंजाम तक पहुंचा सकें और मिडल ईस्ट के भूगोल को अपने हक में दोबारा बदल सकें.”


