CGPSC-Vyapam Exam : रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। राज्य में CGPSC और व्यापम जैसी भर्ती परीक्षाओं में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की मांग उठ रही है। शिक्षा और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी प्रणाली लागू करने से नकल, फर्जी अभ्यर्थियों की एंट्री और परीक्षा में अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
AI तकनीक से कैसे बदलेगी परीक्षा व्यवस्था?
विशेषज्ञों के अनुसार AI आधारित कैमरे और सॉफ्टवेयर परीक्षा केंद्रों पर संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर सकते हैं। फेस रिकग्निशन, लाइव वीडियो एनालिटिक्स और डिजिटल मॉनिटरिंग के जरिए यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि परीक्षा देने वाला व्यक्ति वही है जिसने आवेदन किया है। इसके अलावा परीक्षा कक्ष में असामान्य गतिविधियों, बार-बार इधर-उधर देखने या अनुचित व्यवहार जैसी घटनाओं पर भी AI सिस्टम स्वतः अलर्ट जारी कर सकता है।
पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर
पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न राज्यों में भर्ती परीक्षाओं को लेकर उठे विवादों के बाद तकनीक आधारित निगरानी की आवश्यकता महसूस की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में AI और डिजिटल ऑडिट सिस्टम को शामिल किया जाए तो परिणामों पर उम्मीदवारों का विश्वास और अधिक मजबूत होगा। इससे परीक्षा संचालन में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ प्रशासनिक जवाबदेही भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
क्या होंगे उम्मीदवारों को फायदे?
AI आधारित निगरानी लागू होने से वास्तविक अभ्यर्थियों को निष्पक्ष माहौल मिलेगा। फर्जीवाड़े और नकल की संभावनाएं कम होंगी, जिससे मेहनत करने वाले उम्मीदवारों को समान अवसर मिल सकेगा। साथ ही परीक्षा केंद्रों की निगरानी अधिक प्रभावी होने से किसी भी शिकायत की जांच के लिए डिजिटल रिकॉर्ड भी उपलब्ध रहेगा।
तकनीक के साथ मजबूत सुरक्षा व्यवस्था भी जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल AI तकनीक अपनाना ही पर्याप्त नहीं होगा। इसके साथ सुरक्षित प्रश्नपत्र वितरण, बायोमेट्रिक सत्यापन, मजबूत साइबर सुरक्षा, प्रशिक्षित परीक्षा कर्मी और नियमित तकनीकी ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं भी जरूरी होंगी। इससे परीक्षा प्रणाली अधिक विश्वसनीय और सुरक्षित बन सकेगी।
फिलहाल कोई आधिकारिक घोषणा नहीं
हालांकि, अभी तक राज्य सरकार, CGPSC या व्यापम की ओर से AI आधारित निगरानी प्रणाली लागू करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। फिलहाल यह मांग विभिन्न स्तरों पर चर्चा का विषय बनी हुई है। यदि भविष्य में इस दिशा में कोई निर्णय लिया जाता है, तो छत्तीसगढ़ की भर्ती परीक्षाओं में तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।
प्रदेश के लाखों प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों की नजर अब इस बात पर है कि भविष्य में परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए कौन-कौन से तकनीकी सुधार लागू किए जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक और मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था का संतुलित उपयोग भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता को नई मजबूती दे सकता है।



