CG BREAKING : रायपुर। छत्तीसगढ़ भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक स्तर पर नई नियुक्तियां की गई हैं। पार्टी ने विभिन्न प्रकोष्ठों की जिम्मेदारियों में बदलाव करते हुए चुन्नीलाल साहू को प्रकोष्ठ संकुल संयोजक नियुक्त किया है। वहीं लाभचंद बाफना को प्रकोष्ठ संकुल सहसंयोजक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसके साथ ही पार्टी ने 15 अलग-अलग प्रकोष्ठों के प्रभारी और संयोजकों की नियुक्ति कर संगठनात्मक गतिविधियों को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। नई नियुक्तियों के बाद भाजपा संगठन में सक्रियता बढ़ने की संभावना है।
15 प्रकोष्ठों की जिम्मेदारी तय
भाजपा संगठन में अलग-अलग वर्गों और क्षेत्रों तक पहुंच बनाने के लिए विभिन्न प्रकोष्ठों का गठन किया जाता है। इन प्रकोष्ठों के माध्यम से समाज के अलग-अलग वर्गों, पेशेवर समूहों और संगठनों के साथ संवाद स्थापित किया जाता है।

नई नियुक्तियों के तहत 15 प्रकोष्ठों के लिए जिम्मेदार पदाधिकारियों के नाम घोषित किए गए हैं। संबंधित पदाधिकारियों को अपने-अपने प्रकोष्ठ की गतिविधियों को आगे बढ़ाने और संगठन की नीतियों को आम लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है।
चुन्नीलाल साहू को मिली अहम जिम्मेदारी
प्रकोष्ठ संकुल संयोजक के रूप में चुन्नीलाल साहू अब विभिन्न प्रकोष्ठों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की भूमिका निभाएंगे। संगठन के अलग-अलग प्रकोष्ठों की गतिविधियों को प्रभावी तरीके से संचालित करना और उनके बीच तालमेल बनाना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल रहेगा।
पार्टी की ओर से किए गए इस संगठनात्मक बदलाव को आगामी राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लाभचंद बाफना सहसंयोजक नियुक्त
वहीं लाभचंद बाफना को प्रकोष्ठ संकुल सहसंयोजक नियुक्त किया गया है। वे संयोजक के साथ मिलकर विभिन्न प्रकोष्ठों की गतिविधियों के संचालन और संगठनात्मक समन्वय में भूमिका निभाएंगे।
भाजपा लगातार संगठन को बूथ और स्थानीय स्तर तक मजबूत करने पर जोर दे रही है। ऐसे में प्रकोष्ठों के माध्यम से अलग-अलग सामाजिक और पेशेवर वर्गों तक पहुंच बढ़ाने की रणनीति पर काम किया जा सकता है।
संगठनात्मक गतिविधियों को मिलेगी गति
नई नियुक्तियों के बाद भाजपा के विभिन्न प्रकोष्ठों की बैठकें, सामाजिक संवाद कार्यक्रम और संगठनात्मक अभियान तेज होने की संभावना है। पार्टी पदाधिकारी अपने-अपने प्रभार वाले क्षेत्रों और प्रकोष्ठों में संगठन को सक्रिय करने का काम करेंगे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह की नियुक्तियां संगठन के विस्तार और कार्यकर्ताओं के बीच जिम्मेदारियों के बेहतर वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।




