रायपुर | छत्तीसगढ़ सरकार की नई नक्सल पुनर्वास नीति अब जमीन पर एक मानवीय चेहरा लेकर उतर रही है। प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा की पहल पर आत्मसमर्पण कर चुके पूर्व नक्सलियों के एक समूह को रायपुर स्थित नंदनवन जंगल सफारी का भ्रमण कराया गया। इस आयोजन का उद्देश्य इन लोगों को भय मुक्त वातावरण और सामान्य नागरिक जीवन का अनुभव कराना था।
नंदनवन में बिताया समय, देखी वन्यजीवों की दुनिया
बस्तर के घने जंगलों में बंदूक थामे रहने वाले इन पूर्व नक्सलियों के लिए रायपुर की जंगल सफारी का अनुभव बिल्कुल अलग था। सफारी भ्रमण के दौरान उन्होंने वन्यजीवों को देखा और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का आनंद लिया। कई पूर्व नक्सलियों के लिए यह पहला मौका था जब वे बिना किसी डर के खुली हवा में राजधानी की सड़कों और पर्यटन स्थलों पर घूम रहे थे।
गृह मंत्री के साथ ‘पंगत’ में चर्चा: सुनीं मन की बातें
भ्रमण के बाद गृह मंत्री विजय शर्मा ने इन सभी को अपने निवास पर भोजन के लिए आमंत्रित किया।
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व्यक्तिगत संवाद: भोजन के दौरान गृह मंत्री ने प्रत्येक व्यक्ति से उनके अनुभवों, परिवार की स्थिति और भविष्य की योजनाओं पर व्यक्तिगत चर्चा की।
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भरोसा दिलाया: मंत्री शर्मा ने स्पष्ट किया कि सरकार केवल आत्मसमर्पण नहीं चाहती, बल्कि उनका पूर्ण पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना चाहती है।
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समस्याओं का समाधान: उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन सभी के राशन कार्ड, आधार कार्ड और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ तुरंत सुनिश्चित किया जाए।
“बंदूक छोड़ें, विकास से जुड़ें” का संदेश
इस मुलाकात के दौरान गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा:
“समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले हमारे भाई-बहनों का स्वागत है। हम चाहते हैं कि वे बस्तर के विकास में भागीदार बनें। आज का यह संवाद यह बताने के लिए है कि सरकार उनके साथ खड़ी है और हिंसा का रास्ता छोड़कर आने वालों के लिए मुख्यधारा के दरवाजे हमेशा खुले हैं।”
पुनर्वास नीति का ‘मानवीय चेहरा’
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रयासों से न केवल आत्मसमर्पित नक्सलियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि अभी भी जंगलों में सक्रिय नक्सलियों के बीच भी सकारात्मक संदेश जाएगा। यह पहल दिखाती है कि सरकार केवल सैन्य कार्रवाई पर ही नहीं, बल्कि ‘हृदय परिवर्तन’ और ‘सामाजिक एकीकरण’ पर भी जोर दे रही है।



