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जेल की दीवारों के पार पहुंची आवाज
महिला जेल परिसर में सुबह से अलग माहौल था। कई बंदिनियों के चेहरे पर लंबे समय बाद मुस्कान दिखी। किसी ने बच्चों का हाल पूछा, तो किसी ने मां की आवाज सुनते ही आंखें पोंछ लीं। स्क्रीन छोटी थी, लेकिन उस पल में दूरी बहुत कम लग रही थी।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की घोषणा के बाद शुरू हुई इस सुविधा को जेल विभाग और BSNL के बीच हुए MoU के तहत स्थापित किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इससे बंदिनियों को मानसिक राहत मिलेगी और परिवार से संवाद बेहतर होगा। जेल प्रशासन के अनुसार, वीडियो कॉलिंग प्रक्रिया तय नियमों और निगरानी व्यवस्था के भीतर संचालित की जाएगी। हर कॉल का समय निर्धारित रहेगा। सुरक्षा और गोपनीयता दोनों का ध्यान रखा जाएगा।
भावनाओं से भरा मदर्स डे
एक अधिकारी ने बताया कि कई बंदिनियां अपने बच्चों से महीनों बाद आमने-सामने बात कर सकीं। कुछ पल ऐसे भी आए जब बातचीत के दौरान पूरा कमरा शांत हो गया। मोबाइल स्क्रीन के उस पार बच्चों की आवाज सुनकर कई आंखें नम दिखीं। जेल सुधार से जुड़े विशेषज्ञ मानते हैं कि परिवार से संपर्क कैदियों के व्यवहार और मानसिक संतुलन पर सकारात्मक असर डालता है। खासकर महिला बंदिनियों के मामले में यह सुविधा बेहद अहम मानी जा रही है।


