Mahadev Betting App Case : रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में जांच एजेंसियों को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। ऐप के सह-संचालक और मामले के प्रमुख आरोपी रवि उप्पल को दुबई में गिरफ्तार किए जाने की खबर सामने आई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब कुछ दिन पहले ही मामले के दूसरे प्रमुख आरोपी सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाया गया है। रवि उप्पल की गिरफ्तारी को महादेव सट्टा सिंडिकेट के खिलाफ जांच में अहम सफलता माना जा रहा है।
हालांकि, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की ओर से भारत सरकार को गिरफ्तारी की आधिकारिक सूचना अभी तक नहीं मिली है। भारतीय जांच एजेंसियों को अनौपचारिक माध्यमों से इसकी जानकारी मिली है। अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) उसे भारत लाने के लिए प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज करने में जुटे हैं।
इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर गिरफ्तारी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 46 वर्षीय रवि उप्पल को दुबई पुलिस ने भारत की जांच एजेंसियों के अनुरोध पर जारी इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर हिरासत में लिया है। उसके खिलाफ अक्टूबर 2023 में रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। इससे पहले दिसंबर 2023 में भी उसे दुबई में हिरासत में लिया गया था, लेकिन करीब 45 दिन बाद उसे छोड़ दिया गया था।
इस बार गिरफ्तारी की जानकारी मिलने के बाद भारतीय एजेंसियां UAE के अधिकारियों से औपचारिक पुष्टि और आवश्यक दस्तावेज हासिल करने की कोशिश कर रही हैं।
सौरभ चंद्राकर के बाद अब रवि उप्पल पर शिकंजा
महादेव ऐप के कथित मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल दोनों को इस सट्टा नेटवर्क का प्रमुख संचालक माना जाता है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, दोनों दुबई से इस नेटवर्क का संचालन करते थे। सौरभ चंद्राकर को 1 नवंबर को ओमान से भारत लाया गया था। इसके बाद दिल्ली की अदालत में पेशी और पुलिस रिमांड की कार्रवाई हुई।
अब रवि उप्पल की गिरफ्तारी से जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि सट्टा नेटवर्क के संचालन, आर्थिक लेन-देन और इससे जुड़े अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकती हैं।
करोड़ों के हवाला नेटवर्क को संभालने का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि रवि उप्पल महादेव सट्टा ऐप के वित्तीय नेटवर्क को संभालता था। उस पर करोड़ों रुपये के हवाला लेन-देन और सट्टा कारोबार से जुड़े ऑपरेटरों के साथ संपर्क बनाए रखने का आरोप है। एजेंसी के अनुसार, उसकी भूमिका पैसों के लेन-देन और कथित अवैध कमाई को विदेशों तक पहुंचाने में अहम थी।
जांच में यह भी सामने आया है कि रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर दोनों छत्तीसगढ़ के भिलाई के रहने वाले हैं। दोनों ने भारत छोड़ने के बाद वानुआतु (Vanuatu) की नागरिकता और पासपोर्ट हासिल किए थे।




