कोलकाता रेप-मर्डर केस पर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के बीच मीटिंग जारी है। जूनियर डॉक्टरों का दल अपने साथ 2 स्टेनोग्राफर लेकर गया है, जो इस मीटिंग में हुई बातचीत रिकॉर्ड करेगा।
ममता ने डॉक्टरों को सोमवार को 5वीं बार मुलाकात के लिए बुलाया था और कहा था कि बातचीत का ये आखिरी मौका है। इससे पहले 4 बार बंगाल सरकार डॉक्टरों को बुला चुकी है, लेकिन चारों बार बातचीत नहीं हो सकी।
राज्य सरकार ने सोमवार सुबह मुलाकात के लिए डॉक्टरों को ई-मेल भेजा था। शाम करीब 5 बजे डॉक्टर्स ने कहा कि वो भी मुलाकात करना चाहते हैं। लेकिन उन्होंने इसके लिए कुछ शर्तें रखीं। डॉक्टरों ने कहा कि मीटिंग में क्या बातचीत हुई, इसका रिकॉर्ड दोनों पार्टियां रखें और इसकी कॉपियां भी शेयर की जाएं। बातचीत करने वाले दोनों पक्ष इस पर दस्तखत करें।
आरजी कर मेडिकल कॉलेज में 8 अगस्त को ट्रेनी डॉक्टर के रेप-मर्डर के बाद लगातार 38 दिन से जूनियर डॉक्टर्स प्रदर्शन कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि डॉक्टर्स प्रदर्शन खत्म कर काम पर लौटें तो उन पर एक्शन नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने 9 सितंबर को कोलकाता रेप-मर्डर केस की सुनवाई के दौरान जूनियर डॉक्टरों को 10 सितंबर की शाम 5 बजे तक काम पर लौटने का आदेश दिया था। कोर्ट ने आदेश न मानने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे ड्यूटी पर नहीं लौटेंगे।
ट्रेनी डॉक्टर की मां ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री और आंदोलनकारी डॉक्टरों के बीच बातचीत से नतीजे निकलेंगे। उन्होंने कहा- केवल यह कहने से बात नहीं बनेगी कि जो भी दोषी पाया जाएगा उसे दंडित किया जाएगा। ममता को डॉक्टरों की मांगों को पूरा करना होगा।
कोलकाता रेप-मर्डर केस में आज दूसरी स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करेगी। 9 सितंबर को सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी ने पहली रिपोर्ट पेश की थी। जिसमें कई खुलासे किए गए थे।
रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि केस से जुड़े कुछ दस्तावेज गायब हैं। इस पर कोर्ट ने कहा था- यह मामला गड़बड़ लगता है। कोर्ट ने राज्य सरकार को मिसिंग डॉक्यूमेंट कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया था।
- राज्य सरकार ने जांच एजेंसी को घटना वाले दिन का सिर्फ 27 मिनट का CCTV वीडियो शेयर किया। राज्य सरकार ने कहा था- वीडियो के कुछ हिस्से दिए गए हैं। कुछ तकनीकी गड़बड़ आई थी।
- ट्रेनी डॉक्टर की बॉडी जब मिली थी तो वह अर्धनग्न थी। सरकार ने बंगाल में में जांच कराई। जबकि ने सैंपल को और बाहर की फोरेंसिक लैब में भेजने का फैसला लिया है।
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कोलकाता रेप-मर्डर केस मामले में 14 सितंबर को ने आरजी कर कॉलेज एंड हॉस्पिटल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष और एक थाने के अभिजीत मंडल को गिरफ्तार कर लिया। सूत्रों के मुताबिक, दोनों पर सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप लगा है।
अभिजीत मंडल ताला पुलिस स्टेशन में स्टेशन हाउस ऑफिसर के पद पर तैनात था। दोनों को 17 सितंबर तक की कस्टडी में भेज दिया गया।
आरजी कर मामले में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोपी संजय रॉय को कोलकाता पुलिस ने वारदात के दूसरे दिन गिरफ्तार किया था।
24 अगस्त को घोष के खिलाफ वित्तीय अनियमितता का मामला दर्ज किया था। ने यह कार्रवाई कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर की थी। इसके बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने 28 अगस्त को संदीप घोष की सदस्यता सस्पेंड कर दी थी।5 सितंबर को की जांच में सामने आया था कि ट्रेनी डॉक्टर के रेप-मर्डर के अगले दिन ही संदीप घोष ने सेमिनार हॉल से लगे कमरों के रेनोवेशन का ऑर्डर दिया था। ट्रेनी डॉक्टर का शव 9 अगस्त की सुबह सेमिनार हॉल में ही मिला था।
सूत्रों के मुताबिक, को ऐसे डॉक्यूमेंट मिले हैं, जिनमें इस बात की पुष्टि हुई है कि संदीप घोष ने 10 अगस्त को लेटर लिखकर स्टेट पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट को सेमिनार हॉल से लगे कमरे और टॉयलेट का रेनोवेशन करने को कहा था। इस परमिशन लेटर पर घोष के साइन भी हैं।
स्टाफ ने सेमिनार हॉल से लगे कमरे का रेनोवेशन शुरू कर दिया था। हालांकि, कॉलेज स्टूडेंट्स ने इस केस को लेकर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था, जिसके चलते रेनोवेशन के काम को वहीं रोक दिया गया।
जांच अधिकारियों का कहना है कि रेनोवेशन लेटर से यह साफ हो रहा है कि घोष को यह काम कराने की जल्दी थी, लिहाजा यह डॉक्यूमेंट रेप-मर्डर केस और आरजी कर कॉलेज में वित्तीय गड़बड़ी के केस के बीच कड़ी जोड़ने में मदद कर सकता है।
13 अगस्त की शाम आरजी कर मेडिकल कॉलेज के सेमिनार हॉल के पास शुरू हुए रेनोवेशन की तस्वीर।- संदीप घोष ने मेडिकल हाउस स्टाफ की नियुक्ति के लिए एक इंटरव्यू सिस्टम शुरू किया। हालांकि अस्पताल में इंटरव्यू लेने वालों का कोई पैनल नहीं था। नियुक्ति से पहले इंटरव्यू के फाइनल मार्क्स जारी किए जाते थे। घोष पर कई योग्य ट्रेनी डॉक्टरों को नियुक्त नहीं करने का भी आरोप है।
- संदीप घोष 2016 से 2018 के बीच मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज में पोस्टेड था। वह तब से बिप्लव और सुमन को जानता था। घोष अपने सिक्योरिटी गार्ड, बिप्लव और सुमन के साथ भ्रष्टाचार का नेटवर्क चलाता था।
- घोष ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज में प्रिंसिपल बनने के बाद बिप्लव और सुमन को कोलकाता बुला लिया। उसने दोनों वेंडर्स को अस्पताल के कई टेंडर दिलवाए। घोष का गार्ड अस्पताल के बायोमेडिकल कचरे को बेचने के लिए भी वेंडर्स से कॉन्ट्रैक्ट करता था।
- बिप्लब मां तारा ट्रेडर्स, बाबा लोकनाथ, तियाशा एंटरप्राइजेज समेत कई कंपनियां चलाता था। वह इन सभी कंपनियों के नाम पर अस्पताल में टेंडर्स के लिए अप्लाई करता था। ताकि टेंडर के लिए मार्केट में कॉम्पिटिशन दिखे। इसी में किसी एक कंपनी को टेंडर मिलता था।
- को बिप्लब की कंपनियों को टेंडर दिए जाने के तरीके में भी कई खामियां मिली हैं। ने कहा कि वर्क ऑर्डर के लेटर कॉलेज के कई अधिकारियों को लिखे जाते थे, लेकिन उन्हें ये लेटर कभी सौंपे ही नहीं गए। इसका मतलब टेंडर प्रोसेस में अन्य अधिकारियों को शामिल नहीं किया गया।
- एजेंसी के मुताबिक, घोष के गार्ड की पत्नी नरगिस की कंपनी ईशान कैफे को अस्पताल में कैंटीन का ठेका मिला। संदीप घोष ने गार्ड की पत्नी की कंपनी को नॉन-रिफंडेबल कॉशन मनी भी लौटा दी।



