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    Home » प्रवचन नहीं बल्कि विलक्षण दार्शनिक प्रयोग, 21 दिवसीय विलक्षण प्रवचन का आज चौथा दिन !
    Chhattisgarh

    प्रवचन नहीं बल्कि विलक्षण दार्शनिक प्रयोग, 21 दिवसीय विलक्षण प्रवचन का आज चौथा दिन !

    News EditorBy News EditorDecember 2, 2025No Comments4 Mins Read
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    न्यूज जांजगीर-चांपा । परशुराम मार्ग स्थित हनुमान मंदिर में धार्मिक प्रवचन के तीसरे दिन अद्वितीय,विलक्षण और हर विषय पर सारगर्भित वाक्यांश पर डां स्वामी युगल शरण जी ने कहा कि प्रत्येक जीव नास्तिक है क्योंकि उसने अभी तक भगवान को जाना नहीं हैं ।उन्होंने कहा कि जीव के प्रतिपल आनंद चाहने पर भी अभी तक आनंद नहीं मिला है क्योंकि उसने गलत दिशा पकड़ ली हैं । उन्होंने आस्तिकता की पोल खोलते हुए उपस्थित जन-समुदाय की ओर पूछा कि जीवात्मा ने अपने आपको भुला दिया हैं कि मैं कौन हूं , मैं आत्मा हूं और यह हम भूल गए हैं ।

     

    *जीव को भगवान का अंश क्यों कहा जाता हैं, प्रश्नवाचक*

     

    उभरते हुए सुप्रसिद्ध हिंदुत्व स्वामी जी ने बताया कि भगवान के 3 प्रमुख शक्तियां हैं – पहला स्वरुप, दुसरा जीव और तीसरा माया शक्ति ! उन्होंने जीव शक्ति पर कहा कि जीव भगवान का जीवशक्ति विशिष्ट ब्रह्म श्रीकृष्ण का अंश हैं । शक्ति होने के कारण ही उसको ईश्वरीय अंश कहा जाता हैं । उन्होंने कहा कि भगवान की तीन प्रमुख शक्तियाँ हैं – स्वरूप शक्ति, जीव शक्ति, माया शक्ति।

     

    *जीव को नास्तिक क्यों कहा गया हैं*

     

    कथा के तीसरे दिन पूरा पंडाल शांत भाव से स्वामी जी का कथा श्रवण करने शांत चित्त से बैठे दिखाई दिए। स्वामी जी ने कहा कि प्रत्येक जीव आनंद चाहता हैं और आनंद भगवान की पर्यायवाची हैं , इसलिए प्रत्येक जीव आस्तिक हैं लेकिन अनंत कोटि कल्प तक प्रयत्न करने पर भी कोई मनुष्य आस्तिक नहीं हो सकता ।

     

    *भगवान को बिना जाने कैसे सूक्ष्म रुप से अनुभव किया जा सकता हैं*

     

    स्वामी जी ने कहा कि विश्व का प्रत्येक जीव नास्तिक हैं । भगवान को बिना जाने, सूक्ष्म रूप से अनुभव किए बिना जाने कोई भी अनजाने में ही किसी को प्यार नहीं कर सकता । भगवान को पुकार नहीं सकता । जब-तक भगवान नही जानेंगे, तभी तो मानोंगे ना । तभी तो प्यार होगा और विश्वास भी होगा । साहित्यकार और लेखक शशिभूषण सोनी धार्मिक स्थल पर पहुंच रिपोर्टिंग कर रहे हैं । उन्होंने बताया कि धार्मिक प्रवचन प्रारंभ होने से पहले स्वामी जी का आयोजन समिति के सदस्यों ने स्वागत माल्यार्पण तथा महिलाओं ने पुष्प गुच्छ भेंट किया। तत्पश्चात स्वामी जी ने अद्वितीय शैली में पूरे दो घंटे तक बिना रुके व थके प्रवचन करते रहे। उन्होंने दैनिक समाचार-पत्रों से जुड़े हुए और लेखक शशिभूषण सोनी और जगदीश भाई पटेल की प्रशंसा की और उन्हें साधुवाद दिया । कथा का रसपान करने डां श्रीमति धनेश्वरी जागृति, श्रीमति संगीता पाण्डेय, सरिता, वंदना पाण्डेय , रजनी सोनी, पुष्पा-अनिश सिंह, लखनलाल, अर्जुनलाल सोनी, डॉ राम खिलावन यादव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे ।

     

    *भगवान का आखिर क्या अर्थ हैं। हमारी भगवत भक्ति बहिर्मुखी हैं*

     

    स्वामी जी ने कहा कि जो षड़ ऐश्वर्यों से युक्त हैं, वे ही भगवान हैं । उनके पास आठ गुण हैं – अपहत पाप्मा , विजरो, विमृत्यु, विशोक, विजिधत्सो, पिपास:, सत्यकाम:, सत्य संकल्प:। महराज श्री ने कहा कि हमारी भगवत भक्ति बहिर्मुखी हैं ।

     

     

    *भगवान को जान लो वरना मानव देह छिन जायेगा और पछताना पड़ेगा*

     

    स्वामी जी ने लगातार दो-घंटे के धारा प्रवाहित उद्बोधन में कहा कि मनुष्य शरीर मिला इसलिए भगवान को जान लो ,नही तो मानव देह छिन जायेगा और पछताना पड़ेगा । उन्होंने कहा कि समान में चार सौ बीसी करने वाले को हमेशा दंड मिलना चाहिये । उन्होंने कहा कि ऐसे ही ईश्वरीय क्षेत्र में भी होता हैं । आध्यात्मिकता की ओर ले जाते हुए उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक क्षेत्र केवल क्रिया का हैं और हम आत्मा की कमाई नहीं करेंगे तो दंड मिलेगा ।

     

    *भगवान भाव के भूखे होते हैं और हमें सच्चें मन में प्रेम करना चाहिए*

     

    हमें भगवान को जानने के लिए प्रयास करना चाहिए । भगवान को जानने से हमारा विश्वास बढ़ेगा और हमें आनंद मिलेगा। उन्होंने कहा कि भगवान भाव के वश में होते हैं और हमें भगवान से सदैव सच्चें मन से प्रेम करने के लिए प्रयास करना चाहिए ।

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