बांकी मोंगरा, कोरबा। बांकी मोंगरा नगर पालिका परिषद की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नगर पालिका में नए ट्रैक्टरों की खरीदी के बाद अब उनके पंजीयन और संचालन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, परिषद द्वारा खरीदे गए नए ट्रैक्टरों का क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) में पंजीयन नहीं कराया गया है। इसके बावजूद इन वाहनों को सार्वजनिक सड़कों पर चलाए जाने का आरोप है। यदि यह जानकारी सही साबित होती है, तो यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सड़क सुरक्षा और नागरिकों की जान से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े करेगा।
नए ट्रैक्टरों पर नंबर प्लेट कहां? पंजीयन को लेकर उठे सवाल
नगर पालिका परिषद द्वारा खरीदे गए नए ट्रैक्टरों को लेकर चर्चा है कि कई वाहनों पर अब तक पंजीयन नंबर अंकित नहीं है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन वाहनों का नियमानुसार RTO में पंजीयन कराया गया है? यदि पंजीयन नहीं हुआ है, तो सार्वजनिक सड़कों पर इनका संचालन किस आधार पर किया जा रहा है?
वाहनों की खरीदी के बाद पंजीयन, आवश्यक दस्तावेज और सड़क पर संचालन से संबंधित नियमों का पालन सुनिश्चित करना संबंधित निकाय की जिम्मेदारी है। ऐसे में नगर पालिका प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि ट्रैक्टरों का पंजीयन कब कराया गया, उनके दस्तावेज कहां हैं और यदि पंजीयन लंबित है, तो उन्हें सड़कों पर चलाने की अनुमति किस आधार पर दी गई है।
हालांकि, इस संबंध में अभी RTO के आधिकारिक रिकॉर्ड और नगर पालिका के दस्तावेजों की पुष्टि होना बाकी है।
बिना लाइसेंस चालकों से ट्रैक्टर चलवाने का भी आरोप
मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। आरोप है कि नगर पालिका परिषद में कुछ ट्रैक्टर ऐसे चालकों से चलवाए जा रहे हैं, जिनके पास आवश्यक वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है। यदि यह आरोप सही पाया जाता है, तो यह यातायात नियमों और सार्वजनिक सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मामला होगा।
सवाल यह है कि वाहनों के संचालन से पहले चालकों के लाइसेंस और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच की जा रही है या नहीं? क्या नगर पालिका प्रशासन ने ट्रैक्टरों के सुरक्षित संचालन के लिए कोई व्यवस्था बनाई है? यदि नहीं, तो किसी दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी?
नगर पालिका प्रशासन को इन सवालों का तथ्यात्मक जवाब देना चाहिए, ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना को रोका जा सके।
क्या CMO ही नगर पालिका का पूरा तंत्र चला रही हैं?
नगर पालिका की कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष की चर्चा है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि CMO के निर्णयों और कार्यशैली पर प्रभावी निगरानी नहीं हो रही है। नगर पालिका में लिए जाने वाले निर्णयों, खरीदी और वाहनों के संचालन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई भी अधिकारी नियमों और जवाबदेही से ऊपर नहीं होता। नगर पालिका की प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे शासन के नियमों के अनुसार कार्य करें और सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता बनाए रखें।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या नगर पालिका में सभी प्रक्रियाओं का नियमानुसार पालन हो रहा है? यदि सब कुछ नियमों के अनुसार है, तो परिषद प्रशासन को ट्रैक्टरों के पंजीयन और संचालन से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
PIC सदस्य, पार्षद और नेता प्रतिपक्ष की चुप्पी पर सवाल
नगर पालिका परिषद में PIC सदस्यों, पार्षदों और नेता प्रतिपक्ष की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। जनता अपने प्रतिनिधियों को इसलिए चुनकर भेजती है, ताकि वे नगर के विकास कार्यों की निगरानी करें, सरकारी धन के उपयोग पर नजर रखें और अधिकारियों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करें।
यदि नए ट्रैक्टरों के पंजीयन और संचालन में वास्तव में कोई अनियमितता है, तो क्या जनप्रतिनिधियों ने इस विषय पर जानकारी मांगी है? क्या PIC सदस्यों और पार्षदों ने वाहनों के दस्तावेजों की जांच कराई है? क्या नेता प्रतिपक्ष ने इस मामले को परिषद की बैठक में उठाया है?
इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है। जनता को यह जानने का अधिकार है कि उसके द्वारा चुने गए प्रतिनिधि नगर पालिका के कामकाज की निगरानी किस तरह कर रहे हैं।
जनता के टैक्स के पैसे का हिसाब कौन देगा?
नगर पालिका परिषद में होने वाली खरीदी और विकास कार्यों में खर्च होने वाला पैसा जनता से प्राप्त करों और अन्य सार्वजनिक संसाधनों से आता है। इसलिए प्रत्येक खर्च का उचित औचित्य, पारदर्शी प्रक्रिया और नियमानुसार उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
ट्रैक्टरों की खरीदी पर कितना खर्च हुआ? खरीदी की प्रक्रिया किस तरह पूरी की गई? वाहनों का पंजीयन कराया गया है या नहीं? उनके संचालन के लिए आवश्यक दस्तावेज और योग्य चालक उपलब्ध हैं या नहीं? इन सभी बिंदुओं पर नगर पालिका प्रशासन को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।
सार्वजनिक धन से खरीदे गए वाहनों का सुरक्षित और नियमसम्मत उपयोग सुनिश्चित करना परिषद की जिम्मेदारी है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है, तो उसकी जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
दुर्घटना के बाद जागेगा नगर पालिका प्रशासन?
बिना पंजीयन वाले वाहनों और बिना वैध लाइसेंस के चालकों से संबंधित आरोपों की समय रहते जांच होना आवश्यक है। यदि किसी वाहन के संचालन में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों को तत्काल नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
किसी दुर्घटना के बाद जिम्मेदारी तय करने के बजाय पहले से सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। नगर पालिका प्रशासन को ट्रैक्टरों के पंजीयन प्रमाणपत्र, बीमा, लागू फिटनेस संबंधी दस्तावेज और चालकों के वैध लाइसेंस की जांच करानी चाहिए।
जनता चाहती है जवाब, प्रशासन कब देगा स्पष्टीकरण?
बांकी मोंगरा नगर पालिका परिषद में नए ट्रैक्टरों की खरीदी और उनके संचालन को लेकर उठ रहे सवालों पर अब स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। नगर पालिका CMO, PIC सदस्यों, पार्षदों और नेता प्रतिपक्ष को इस विषय पर अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि ट्रैक्टरों का पंजीयन हो चुका है, तो उनके दस्तावेज सामने क्यों नहीं रखे जा रहे? और यदि पंजीयन नहीं हुआ है, तो सार्वजनिक सड़कों पर उनका संचालन क्यों किया जा रहा है?
जनता को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि तथ्यों के आधार पर जवाब चाहिए। अब देखना होगा कि नगर पालिका प्रशासन इन सवालों का जवाब देता है या फिर यह मामला भी फाइलों और आरोप-प्रत्यारोप के बीच दबकर रह जाता है।




