नई दिल्ली। देश में दवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने आयातित दवाओं को लेकर बड़ा फैसला लिया है। नए नियमों के तहत अब ऐसी दवाओं को भारत में आयात की अनुमति तभी मिलेगी, जब उनकी एक्सपायरी (वैधता) अवधि कम से कम 12 महीने शेष होगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से कम अवधि वाली दवाओं की बिक्री पर रोक लगेगी और मरीजों तक बेहतर गुणवत्ता वाली दवाएं पहुंच सकेंगी।
मरीजों की सुरक्षा को मिलेगी प्राथमिकता
सरकार का कहना है कि कई बार कम बची हुई एक्सपायरी वाली आयातित दवाएं बाजार में पहुंच जाती हैं, जिससे मरीजों को दवा का पूरा उपयोग करने का समय नहीं मिल पाता। ऐसे मामलों को देखते हुए यह नया प्रावधान लागू किया गया है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि भारत में आने वाली दवाएं पर्याप्त शेल्फ लाइफ के साथ उपलब्ध हों।
दवा आयातकों के लिए नए मानक लागू
नए नियम लागू होने के बाद दवा आयात करने वाली कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि भारत पहुंचने वाली प्रत्येक खेप में शामिल दवाओं की वैधता कम से कम 12 महीने शेष हो। यदि किसी दवा की एक्सपायरी अवधि इससे कम होगी तो उसे देश में आयात की अनुमति नहीं दी जाएगी। इससे आयात प्रक्रिया में गुणवत्ता नियंत्रण और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।
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गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था होगी मजबूत
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से दवा आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता बढ़ेगी और गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होगा। इससे अस्पतालों, मेडिकल स्टोर और वितरकों को भी पर्याप्त समय तक दवाओं का सुरक्षित भंडारण और वितरण करने में सुविधा मिलेगी। साथ ही एक्सपायर होने वाली दवाओं के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान में भी कमी आने की संभावना है।
उपभोक्ताओं और स्वास्थ्य क्षेत्र को मिलेगा लाभ
नई व्यवस्था से मरीजों को अधिक समय तक उपयोग योग्य दवाएं उपलब्ध होंगी, जिससे दवा की बर्बादी भी कम होगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण है और इससे दवा बाजार में गुणवत्ता के मानकों को और मजबूती मिलेगी। सरकार ने संबंधित आयातकों और दवा कंपनियों से नए नियमों का सख्ती से पालन करने को कहा है।
सरकार का उद्देश्य देश में उपलब्ध सभी आयातित दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और मरीजों के हितों की रक्षा करना है। माना जा रहा है कि इस फैसले से भारतीय दवा बाजार में गुणवत्ता आधारित प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा और स्वास्थ्य सेवाओं में भरोसा भी मजबूत होगा।



