रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की सप्लाई को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने गुढ़ियारी स्थित ‘हमर अस्पताल’ का निरीक्षण करने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि एक तरफ मरीज दवाओं के लिए भटक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अस्पताल के स्टोर में करोड़ों रुपये की दवाएं डंप पड़ी हैं, जिनमें से अधिकांश ‘एक्सपायरी डेट’ के बेहद करीब हैं।
करोड़ों की दवाएं स्टोर में बंद, मरीज बेहाल
पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि सरकार की लापरवाही के कारण जनता के टैक्स के पैसों की बर्बादी हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि:
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अस्पताल में करोड़ों रुपये की ऐसी दवाइयां मंगवाई गई हैं, जिनकी वर्तमान में आवश्यकता नहीं है।
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जरूरी और जीवनरक्षक दवाएं (Life Saving Drugs) काउंटर पर उपलब्ध नहीं हैं, जिससे मरीजों को मजबूरी में बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
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अस्पताल के रिकॉर्ड और स्टॉक में भारी विसंगतियां पाई गई हैं।
“निकट एक्सपायरी” दवाओं की सप्लाई का खेल
विकास उपाध्याय ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि सरकारी सप्लाई चेन में जानबूझकर ऐसी दवाएं भेजी जा रही हैं जिनकी मियाद (Expiry Date) महज कुछ महीने ही बची है। उन्होंने इसे एक बड़ा भ्रष्टाचार बताते हुए कहा कि कमीशन के खेल में निजी कंपनियों से एक्सपायरी के करीब वाली दवाएं औने-पौने दाम पर खरीदी जा रही हैं और उन्हें सरकारी अस्पतालों में खपाया जा रहा है। यदि इन दवाओं का समय पर उपयोग नहीं हुआ, तो करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति कचरे में तब्दील हो जाएगी।
व्यवस्था पर उठाए कड़े सवाल
पूर्व विधायक ने प्रशासन से पूछा है कि जब दवाओं की इतनी बड़ी खेप मौजूद है, तो मरीजों को “दवा उपलब्ध नहीं है” कहकर वापस क्यों भेजा जा रहा है? उन्होंने आशंका जताई है कि इस डंपिंग के पीछे आपूर्ति करने वाली कंपनियों और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत हो सकती है।
जांच की मांग और आंदोलन की चेतावनी
इस मामले को लेकर कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाया है। विकास उपाध्याय ने मांग की है कि:
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रायपुर के सभी सरकारी अस्पतालों के स्टॉक की उच्च स्तरीय जांच की जाए।
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एक्सपायरी दवाओं की सप्लाई करने वाले दोषियों पर एफआईआर दर्ज हो।
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दवाओं के स्टॉक का डिजिटल रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मरीजों को अस्पताल के भीतर से निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण दवाएं मिलना शुरू नहीं हुईं, तो कांग्रेस उग्र आंदोलन करेगी।


