कलचुरी शासकों ने छत्तीसगढ़ को समृद्ध और विकसित बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके इस योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने के लिए यह संगोष्ठी एक सार्थक प्रयास है।”
उक्त बातें स्वास्थ्य मंत्री शयमबिहारी जायसवाल ने कलचुरी राजवंश इतिहास एवं पुरातत्व शोध समिति, कोरबा द्वारा कटघोरा के गोकुलधाम में आयोजित कलचुरी कालीन इतिहास व पुरातत्व शोध संगोष्ठी एवं बौद्धिक परिचर्चा के शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि की आसंदी से कही।
देश के विभिन्न राज्यों से कलचुरी जायसवाल कलार समाज के लोग एकत्रित हुए हैं। इस कार्यक्रम में इतिहासकार, पुरातत्वविद् और समाज के प्रबुद्धजन कलचुरी शासनकाल की धरोहर को लेकर विस्तृत चर्चा करेंगे। संगोष्ठी में देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के पुरातत्व विशेषज्ञ कलचुरी साम्राज्य की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और उनके महत्व पर व्याख्यान देंगे। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को कलचुरी राजवंश के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराना है, जिससे वे अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझें और सहेज सकें।
इस अवसर पर देशभर से आए कलचुरी समाज के प्रतिनिधि, इतिहासकार और विद्वान छत्तीसगढ़ राज्य की कला राजधानी तुमान का भी दौरा करेंगे। यह ऐतिहासिक स्थल कलचुरी साम्राज्य के गौरवशाली अतीत का प्रतीक है और इसे संरक्षित करने की आवश्यकता पर भी चर्चा की जाएगी। यह संगोष्ठी न केवल इतिहास और पुरातत्व में रुचि रखने वालों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में भी एक अहम कदम है।
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